॥श्री-चन्द्रमौलीश्वराय नमः॥
॥श्री-कामाक्षी देव्यै नमः॥
॥श्री-कामाक्षी चूर्णिका॥
१. जय जय श्री-कामगिरीन्द्र-निलये।
२. जय जय श्री-कामकोटि-पीठस्थिते।
३. जय जय श्री-त्रिचत्वारिंशत्कोण-श्रीचक्रान्तराल-बिन्दु-पीठोपरि-लसत्पञ्च-ब्रह्ममय-मञ्चमध्यस्थ श्री-शिवकामेश-वामाङ्क-निलये।
४. जय जय श्रीविधिहरिहर-सुरगण-वन्दित-चरणारविन्दयुगले।
५. जय जय श्रीमद्रमा-वाणीन्द्राणी-प्रमुख-रमणी-करकमल-समर्पित चरणकमले।
६. जय जय श्री-निखिल-निगमागम-सकल-संवेद्यमान-विविध-वस्त्रालङ्कृत-हेम-निर्मितानर्घभूषण-भूषित-दिव्य-मूर्ते।
७. जय जय श्री-अनवरताभिषेक धूपदीप नैवेद्यादि नानाविधोपचारैः परिशोभिते।
८. जय जय श्री-श्री-काञ्चीनगर्यां द्वात्रिंशद् धर्मप्रतिपादनार्थं स्थापित हेमध्वजालङ्कृते।
९. जय जय श्री-सकल-मन्त्र-तन्त्र-यन्त्रमय-पराबिलाकाश स्वरूपे।
१०. जय जय श्री-काञ्ची नगर्यां कामाक्षी इति प्रख्यात-नामाङ्किते।
११. जय जय श्री-महात्रिपुरसुन्दरी बहु पराक्।